इस नियम के अनुसार द्रव्य न तो बनाया जा सकता है और नहीं नष्ट किया जा सकता है, इस नियम को आंतोएन लावूसिए ने सन् 1789 मैं दिया था। उन्होंने दहन अभिक्रियाओं का प्रयोग अध्ययन ध्यान पूर्वक किया और फिर ऊपर दिए गए निष्कर्ष पर पहुंचे। कि किसी भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन में कुल द्रव्यमान में कोई परिवर्तन नहीं होता रसायन विज्ञान के बाद की कई संकल्पनाएं इसी पर आधारित है। वास्तव में अभिकर्मको और उत्पादकों के द्रव्यमान के यथार्थपरक मापनो और लावूसिए द्वारा प्रयोग को ध्यान पूर्वक करने के कारण ऐसा संभव हुआ।
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