गुणसूत्र कोशिका (Cell) के नाभिक (Nucleus) में पाए जाने वाले धागेनुमा संरचनाएँ होती हैं। ये आनुवंशिक सूचनाओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य करती हैं। गुणसूत्रों में DNA और प्रोटीन पाए जाते हैं, जो जीव के गुणों को नियंत्रित करते हैं।
गुणसूत्र की खोज
गुणसूत्र शब्द का प्रयोग सबसे पहले वाल्डेयर (Waldeyer) ने किया था। ये कोशिका विभाजन के समय स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
गुणसूत्र की संरचना
गुणसूत्र की मुख्य संरचनाएँ निम्नलिखित हैं:
क्रोमैटिड (Chromatid) – गुणसूत्र की दो समान भुजाएँ
सेंट्रोमियर (Centromere) – वह स्थान जहाँ दोनों क्रोमैटिड जुड़ी होती हैं
टेलोमियर (Telomere) – गुणसूत्र के सिरे
क्रोमोनिमा (Chromonema) – धागेनुमा संरचना जिसमें जीन होते हैं
गुणसूत्र के प्रकार
सेंट्रोमियर की स्थिति के आधार पर गुणसूत्र चार प्रकार के होते हैं:
1.मेटासेंट्रिक
2.सब-मेटासेंट्रिक
3.एक्रोसेंट्रिक
4.टेलोसेंट्रिक
गुणसूत्र के कार्य
आनुवंशिक गुणों का वहन करना
कोशिका विभाजन में सहायता करना
जीव की शारीरिक एवं मानसिक विशेषताओं को नियंत्रित करना
DNA की सुरक्षा करना
निष्कर्ष
गुणसूत्र जीवों की वृद्धि, विकास और वंशानुक्रम में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके बिना आनुवंशिक सूचनाओं का संचार संभव नहीं है।
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