रसोई के मसालों से पाएं बीमारियों से मुक्ति: आसान और 100% असरदार घरेलू उपचार

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रसोई के मसालों से पाएं बीमारियों से मुक्ति: आसान और 100% असरदार घरेलू उपचार

घर पर मसाले उगाएं और उनके औषधीय गुणों का लाभ उठाएं – सम्पूर्ण गाइड

भोजन में प्रतिदिन उपयोग होने वाले अधिकांश मसाले केवल स्वाद ही नहीं बढ़ाते, बल्कि उनमें अनेक रोगों को दूर करने की क्षमता भी छिपी होती है। हालाँकि जब कई मसालों को एक साथ मिला दिया जाता है तो भले ही खाने का ज़ायका बढ़ जाए, किन्तु औषधीय दृष्टि से उस मिश्रण का प्रभाव प्रायः समाप्त हो जाता है। ऐसे में वह मिश्रण दवा के रूप में प्रयोग के योग्य नहीं रहता।

मसालों का दोहरा लाभ – स्वाद भी, सेहत भी

आमतौर पर मसालों को स्वाद बढ़ाने वाला (स्वादवर्धक) और पाचन में सहायक (पाचक) माना जाता है। यही इनका सबसे प्रचलित उपयोग है। लेकिन इन्हें सुरक्षित घरेलू चिकित्सा के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है। यही कारण है कि अपने घर के आँगन, छत या किसी उपयुक्त स्थान पर एक-दो क्यारियाँ मसालों और औषधियों के लिए आरक्षित कर लेना अच्छा विचार है। मसाले के पौधे हर ऋतु में उगाए और बनाए रखे जा सकते हैं। बस खाद, पानी, धूप और हवा का ध्यान रखना ज़रूरी है। कुछ महीने सभी हरी वनस्पतियों के लिए अनुकूल होते हैं, कुछ सामान्य। यह स्थानीय मिट्टी और वातावरण पर भी निर्भर करता है। पड़ोसियों या सब्ज़ी उगाने वाले किसानों से जानकारी लेकर आप आसानी से शुरुआत कर सकते हैं। यदि मिट्टी की अच्छी देखभाल रखी जाए तो मसालों के पौधे हर महीने बोए और इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

रोज़मर्रा के मसाले और 'अति' का प्रभाव

हल्दी, सौंफ, धनिया, अजवाइन, राई, अदरक (सोंठ) जैसे मसाले भोजन में अतिरिक्त रूप से डाले जाते हैं। वहीं नमक और मिर्च का तो नित्य प्रयोग होता है, इसलिए हमें इनके विशेष गुणों का पता ही नहीं चलता। ठीक वैसे ही जैसे नशे की आदत वाला व्यक्ति प्रतिदिन तम्बाकू आदि का सेवन करता है और वह उसकी आदत बन जाती है। छोटे बच्चे को मिर्च खिलाने पर वह रोने लगेगा, और नमक की अधिक मात्रा भी असहनीय (असह्य) होती है, लेकिन एक बार आदत पड़ जाने पर तुरंत कोई प्रतिकूल (adverse) असर दिखाई नहीं देता। यहाँ "अति" यानी ज़रूरत से ज़्यादा सेवन पर चर्चा करना आवश्यक है। अति से उत्पन्न होने वाली बीमारियाँ जब परहेज़ (पथ्य) की माँग करती हैं, तब मसालों की असली अहमियत समझ आती है। हृदयाघात, अपच, पेप्टिक अल्सर, गुर्दे की बीमारियों में जब नमक या मिर्च का निषेध कर दिया जाता है, तब अनुभव होता है कि ये किस तरह हमारी दिनचर्या का अभिन्न अंग बन गए थे। सच तो यह है कि अति हर दवा को ज़हर बना देती है और मसाले भी इसके अपवाद (exception) नहीं हैं।

क्यों ज़रूरी है घर पर मसाले उगाना?

बाज़ार में मिलने वाले पुराने, घुन लगे या अशुद्ध सूखे मसालों से बेहतर है कि इन्हें ताज़ा रूप में घर पर ही उगा लिया जाए। केवल कुछ अपवाद हैं जो ताज़े नहीं मिल सकते और खनिजों अथवा अन्य स्रोतों से प्राप्त होते हैं। जिस तरह घरेलू सब्ज़ी की बगिया आँगन, छत, गमलों, पेटियों, टूटी टोकरियों या कनस्तरों में लगाई जाती है, ठीक वैसे ही मसालों के लिए भी घर में या आस-पास जगह खोजी जा सकती है। यदि ज़मीन का बड़ा हिस्सा उपलब्ध हो तो मसालों को अलग-अलग छोटे-छोटे टुकड़ों में बोया जा सकता है।

मसालों में छिपे पोषक तत्त्व और चिकित्सकीय उपयोग

हर मसाले में अनेक विटामिन, खनिज और उपयोगी रासायनिक तत्त्व (chemical compounds) होते हैं। इनमें से जो स्वाद में रुचिकर लगें, उन्हें चुनकर चटनी बनाई जा सकती है और भोजन के साथ खाया जा सकता है। यह तो रसोई को स्वादिष्ट और गुणकारी बनाने की विधि हुई। लेकिन यदि कभी असमय कोई रोग या विकार उत्पन्न हो जाए, तो प्राथमिक उपचार के लिए इन मसालों में से उपयुक्त वनस्पति का चयन कर उपयोग में लाया जा सकता है। इस तरह एक कार्य से कई प्रयोजन सिद्ध होते हैं – भोजन स्वादिष्ट बनता है, कुपोषण निवारक तत्त्वों का समावेश होता है, घर में सुगंधित वातावरण से मन प्रसन्न रहता है तथा कीड़े-मकोड़ों का भी नियंत्रण होता है। इन लाभों को देखते हुए सहज निष्कर्ष यह है कि घरेलू सब्ज़ी वाटिका की तरह ही छोटी मसाला वाटिकाएँ भी हर घर में लगाई जानी चाहिए। साथ ही यह जानना भी ज़रूरी है कि कौन-सा मसाला किस रोग में लाभदायक है और उसकी सही मात्रा क्या होनी चाहिए। भारतीय परिवारों में ये घरेलू नुस्खों के रूप में प्राचीन समय से चली आ रही औषधियाँ हैं, फिर भी मात्रा और प्रयोग की शास्त्रोक्त एवं वैज्ञानिक जानकारी हर दृष्टि से उपयोगी है।

मसाले मिलाने से बचें जब करें चिकित्सकीय प्रयोग

स्वाद के लिए मसालों का मिश्रण अलग बात है, पर जब बात चिकित्सा की आती है तो कई मसालों को एक साथ न मिलाना अधिक अच्छा रहता है। किसी एक ही वनस्पति का प्रयोग करने पर वह अपना पूरा गुण दिखा पाती है। मिश्रण करने से अनेक गुण एक साथ मिलकर उलझन (confusion) पैदा कर सकते हैं। एक पदार्थ दूसरे के गुणों को बढ़ा सकता है, या ऐसा तीसरा प्रभाव उत्पन्न कर सकता है जो अपेक्षित न हो। जैसे लाल, पीला, नीला रंग अलग-अलग मात्रा में मिलाने पर नए रंग बनते हैं, ठीक वैसे ही वनस्पतियाँ भी मिलाने पर अपने मूल गुण खो सकती हैं और कोई अनचाहा प्रभाव दे सकती हैं। इसलिए चिकित्सा में ध्यान रखें कि एक समय में एक ही मसाला/वनस्पति का उपयोग करें। चटनी का उद्देश्य स्वादों की विविधता से एक नया ज़ायका बनाना है, परन्तु दवा के रूप में ऐसा करना उचित नहीं।

मसालों में मिलावट – एक गंभीर समस्या

आमतौर पर मसाले बाज़ार से खरीदे जाते हैं, और पीसने की मेहनत से बचने के लिए पिसे हुए रूप में खरीदना पसंद किया जाता है। साबुत या पिसे दोनों ही रूपों में मिलावट (adulteration) की संभावना बनी रहती है। चालाक दुकानदार इस धंधे में मोटा मुनाफ़ा कमाते हैं और हानिकारक चीज़ें मिला देते हैं। इन मिलावटों की पहचान बिना उच्च तकनीक वाली मशीनों और विशेषज्ञों के संभव नहीं होती। जिस तरह हर खाद्य पदार्थ की शुद्धता ज़रूरी है, उसी तरह मसाले तो और भी अधिक प्रभावी और संवेदनशील (sensitive) होते हैं, इसी कारण इन पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए। बाज़ार में राई के साथ कटेरी के बीज, जीरे के साथ बुहारी का कचरा, धनिया के साथ चावल के छिलके जैसी मिलावट का जोखिम रहता है। इसलिए, केवल पीसने तक सीमित न रहते हुए, मसालों को अपनी देखरेख में उगाना ही शुद्धता और प्रामाणिकता (authenticity) की गारंटी है, खासकर जब इन्हें चिकित्सा में प्रयोग करना हो।

आयुर्वेद के अनुसार मसालों का औषधीय महत्त्व

आयुर्वेद के ग्रंथों पर नज़र डालें तो पाते हैं कि मसाले के रूप में प्रयुक्त होने वाली औषधियाँ बहुगुणकारी, भूख बढ़ाने वाली और अनेक रोगों का नाश करने वाली हैं। दैनिक जीवन में निरंतर इस्तेमाल के कारण हम प्रायः इनके महत्त्व को नहीं पहचान पाते, लेकिन गहराई से विश्लेषण (analysis) करने पर ज्ञात होता है कि भारतीय भोजन पद्धति ऋषि-मुनियों द्वारा दूरगामी (far-reaching) नीतियों के आधार पर बनाई गई थी।

मसाला-औषधि वाटिका में उगाई जा सकने वाली प्रमुख वनस्पतियाँ

नीचे वे मसाले दिए गए हैं जिन्हें आप आसानी से अपने घर पर उगा सकते हैं और ज़रूरत पड़ने पर औषधि के रूप में प्रयोग कर सकते हैं:

  • राई

  • हल्दी

  • अदरक

  • सौंफ

  • मेथी

  • जीरा

  • मिर्च

  • पुदीना

  • पिप्पली

  • गिलोय

  • तुलसी

  • अजवाइन

  • धनिया

  • लहसुन

  • ग्वारपाठा (एलोवेरा)

  • प्याज

  • आँवला

अन्य उपयोगी मसाले जो घर पर नहीं उगाए जा सकते

कुछ मसाले खनिजों या विशेष वृक्षों से प्राप्त होते हैं, जिन्हें सामान्य घरेलू वाटिका में उगाना संभव नहीं है। ये हैं:

  • सुहागा

  • हींग

  • काला नमक

  • लौंग

  • तेजपत्र

  • दालचीनी

इनमें काला नमक और सुहागा खनिज (minerals) से मिलते हैं, जबकि शेष वृक्षों की छाल, फूल या गोंद से प्राप्त होते हैं। लेकिन भारतीय रसोई के मसालेदान में इनका प्रचलन खूब होता है, अतः इनकी उपयोगिता को देखते हुए शुद्ध रूप में औषधि प्रयोजन हेतु इन्हें घर में ज़रूर रखना चाहिए।

निष्कर्ष

अपने भोजन को सुरक्षित, पौष्टिक और चिकित्सकीय बनाने का सबसे सरल उपाय है – मसालों को स्वयं उगाएँ और शुद्धता सुनिश्चित करें। यह न केवल आपको मिलावट से बचाएगा, बल्कि छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं में प्राथमिक उपचार का भी काम करेगा। एक छोटी-सी मसाला वाटिका आपके घर को सुगंधित, वातावरण को स्वच्छ और परिवार को स्वस्थ रखने का अचूक नुस्खा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या घर पर उगाए गए मसाले वास्तव में बीमारियों में दवा की तरह काम कर सकते हैं? उत्तर: जी हाँ। आयुर्वेद के अनुसार हल्दी, अदरक, तुलसी, मेथी, लहसुन, अजवाइन आदि अनेक मसालों में रोगनिवारक (therapeutic) गुण होते हैं। लेकिन ध्यान रहे, चिकित्सा प्रयोजन के लिए एक समय में एक ही मसाले का प्रयोग करें। कई मसालों को एक साथ मिलाने पर उनका औषधीय प्रभाव नष्ट हो सकता है या अनचाहा प्रभाव (side effect) उत्पन्न हो सकता है।

प्रश्न 2: अगर मैं मसालों का मिश्रण (मसाला मिक्स) बना लूँ और उसे पेट की समस्या में लूँ तो क्या लाभ होगा? उत्तर: बिल्कुल नहीं। चटनी या खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए मसालों का मिश्रण (blend) उपयुक्त है, लेकिन जब बात विशेष रोग के निवारण (treatment) की हो तो किसी एक ही वनस्पति का सेवन करना चाहिए। मिलाने पर गुणों का घपला हो जाता है और अपेक्षित लाभ नहीं मिलता। यह सिद्धांत (principle) एलोपैथी और आयुर्वेद दोनों दवाओं पर लागू होता है।

प्रश्न 3: मुझे बाज़ार से पिसे हुए मसाले लेने में क्या समस्या हो सकती है? उत्तर: पिसे हुए या साबूत दोनों ही रूपों में बाज़ार में मिलावट (adulteration) का बड़ा जोखिम रहता है। धनिया में चावल के छिलके, जीरे में बुहारी कचरा, और रंग-रोगन तक मिलाए जा सकते हैं। ऐसे मसाले न केवल गुणहीन होते हैं बल्कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक (harmful) भी सिद्ध हो सकते हैं। शुद्धता (purity) सुनिश्चित करने का एकमात्र उपाय घर पर उगाकर स्वयं पीसना है।

प्रश्न 4: क्या हर मौसम में मसालों के पौधे उगाए जा सकते हैं? उत्तर: हाँ, यदि उचित देखभाल की जाए तो मसाले के अधिकांश पौधे साल भर उगाए जा सकते हैं। इसके लिए खाद-पानी, धूप-हवा का ध्यान रखना आवश्यक है। कुछ महीने हरी वनस्पतियों के लिए अत्यधिक अनुकूल (favourable) होते हैं, कुछ सामान्य। स्थानीय मिट्टी और वातावरण (local climate) के अनुसार पड़ोसियों या किसानों से सलाह लेकर योजना बनाई जा सकती है।

प्रश्न 5: मेरे पास ज़मीन नहीं है, केवल बालकनी (Balcony) है। क्या मैं गमलों में मसाले उगा सकता हूँ? उत्तर: अवश्य। धनिया, पुदीना, मिर्च, हल्दी, अदरक, मेथी, तुलसी, लहसुन आदि गमलों, पुरानी बाल्टियों, टोकरियों या कनस्तरों (containers) में बड़ी आसानी से लगाए जा सकते हैं। बस पानी की निकासी (drainage) का उचित इंतज़ाम होना चाहिए और उन्हें पर्याप्त धूप मिलनी चाहिए।

प्रश्न 6: "अति" से क्या अभिप्राय है और यह मसालों के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है? उत्तर: "अति" का अर्थ है किसी भी वस्तु का आवश्यकता से अधिक सेवन। नमक, मिर्च जैसे नित्य उपयोग होने वाले मसालों का यदि अति सेवन किया जाए तो वे उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, अपच, पेप्टिक अल्सर और गुर्दे की बीमारियों का कारण बन सकते हैं। हर औषधि (medicine) अति होने पर विष (poison) बन जाती है और मसाले इस नियम के अपवाद (exception) नहीं हैं।

प्रश्न 7: किन मसालों को घर पर नहीं उगाया जा सकता, परन्तु फिर भी रसोई में औषधि की तरह रखना चाहिए? उत्तर: कुछ वस्तुएँ ऐसी हैं जो खनिज (minerals) अथवा विशेष वृक्षों से प्राप्त होती हैं और सामान्य घरेलू बगिया में नहीं उगाई जा सकतीं। इनमें सुहागा, हींग, काला नमक, लौंग, तेजपत्र और दालचीनी प्रमुख हैं। इन्हें शुद्धतम रूप में खरीदकर घर में रखें ताकि चिकित्सकीय आवश्यकता पड़ने पर काम आ सकें।

प्रश्न 8: अगर छोटे बच्चों को खाँसी या पेट दर्द हो तो कौन-सा घरेलू मसाला सबसे पहले आज़माना चाहिए? उत्तर: इसके लिए एकल प्रयोग (single herb use) का सिद्धांत याद रखें। खाँसी में तुलसी का रस या अदरक का शहद के साथ सेवन लाभदायक है। पेट दर्द में अजवाइन या सौंफ का अर्क देना चुरनों के मिश्रण से कहीं अधिक सुरक्षित और प्रभावी (effective) होता है। हालाँकि गंभीर स्थिति में चिकित्सक से परामर्श ज़रूर लें।

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