भारत की कृषि अर्थव्यवस्था में लघु एवं सीमांत किसान

꧁ Digital Diary ༒Largest Writing Community༒꧂


Digital Diary Create a free account



भारत की कृषि अर्थव्यवस्था में लघु एवं सीमांत किसान

भारत में लघु कृषि (Small-Scale Farming) और उसके समाधान
भारत की कृषि अर्थव्यवस्था में लघु एवं सीमांत किसान (Small and Marginal Farmers) का बहुत बड़ा योगदान है, लेकिन वे आर्थिक संकट, जलवायु परिवर्तन और नीतिगत चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इन समस्याओं के उपचार (समाधान) क्या हो सकते हैं? आइए विस्तार से समझते हैं।

1. लघु कृषि क्या है?
परिभाषा: भारत सरकार के अनुसार, 1 हेक्टेयर से कम जमीन वाले किसान सीमांत किसान और 1-2 हेक्टेयर वाले लघु किसान कहलाते हैं।

आँकड़े:

86% भारतीय किसान लघु/सीमांत श्रेणी में आते हैं।

कुल कृषि भूमि का 47% इनके पास है, लेकिन उत्पादकता कम है।

2. लघु कृषि की प्रमुख समस्याएँ
समस्या    विवरण
छोटी जोत (Land Fragmentation)    पीढ़ी दर पीढ़ी जमीन बँटती जा रही है → खेती अलाभकारी हो रही है।
कर्ज़ का बोझ    साहूकारों/बैंकों से कर्ज लेकर खेती करना → न चुका पाने पर आत्महत्याएँ।
सिंचाई की कमी    60% खेती वर्षा-आधारित → सूखे का खतरा।
मंडी तक पहुँच न होना    कमीशन एजेंट (आढ़तियों) द्वारा शोषण → कम मूल्य मिलना।
जलवायु परिवर्तन    अनिश्चित मानसून, बाढ़-सूखा → फसल बर्बादी।
उन्नत तकनीक की कमी    पारंपरिक खेती → कम उत्पादकता।
3. लघु कृषि के समाधान (उपचार)
A. सरकारी योजनाएँ एवं नीतियाँ
PM-KISAN (प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि):

₹6,000 प्रति वर्ष सीधे किसानों के खाते में।

किसान क्रेडिट कार्ड (KCC):

4% ब्याज दर पर ऋण सुविधा।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card):

मिट्टी की गुणवत्ता की जाँच → उर्वरकों का सही उपयोग।

ई-NAM (राष्ट्रीय कृषि मंडी):

ऑनलाइन मंडी से जुड़ाव → बिचौलियों की समस्या कम होगी।

B. तकनीकी समाधान
सूक्ष्म सिंचाई (Micro-Irrigation):

ड्रिप/स्प्रिंकलर सिस्टम से पानी की बचत।

प्रिसिजन फार्मिंग (Precision Farming):

सेंसर, ड्रोन और AI का उपयोग → उत्पादकता बढ़ेगी।

FPOs (किसान उत्पादक संगठन):

छोटे किसान मिलकर समूह बनाएँ → बेहतर मूल्य पाएँ।

C. वैकल्पिक आय के स्रोत
बागवानी और ऑर्गेनिक फार्मिंग:

फल, सब्जियाँ, मसाले → अधिक मुनाफा।

पशुपालन और मत्स्य पालन:

डेयरी, मुर्गी पालन, मछली उत्पादन → अतिरिक्त आय।

एग्रोटूरिज्म (Agro-Tourism):

शहरी लोगों को खेती का अनुभव देकर कमाई।

D. जलवायु-सहिष्णु खेती
जैविक खेती (Organic Farming):

कम लागत, पर्यावरण अनुकूल।

मिश्रित फसल प्रणाली (Mixed Cropping):

एक साथ अलग-अलग फसलें उगाकर जोखिम कम करना।

जल संचयन (Water Harvesting):

तालाब, चेक डैम बनाकर पानी बचाना।

4. सफलता की कहानियाँ (Case Studies)
✅ सहकारी मॉडल – अमूल (गुजरात):

छोटे डेयरी किसानों ने मिलकर दुनिया की सबसे बड़ी डेयरी बनाई।
✅ जैविक खेती – सिक्किम:

पूर्ण जैविक राज्य बनकर निर्यात बढ़ाया।
✅ FPOs – महाराष्ट्र और केरल:

किसानों ने समूह बनाकर सीधे निर्यात शुरू किया।

5. निष्कर्ष: लघु कृषि का भविष्य
चुनौतियाँ: जलवायु परिवर्तन, बाजार तक पहुँच की कमी, कर्ज़ का दबाव।

संभावनाएँ: तकनीक, सहकारी समितियाँ, सरकारी योजनाएँ।

जरूरी कदम:

किसानों को सीधे बाजार से जोड़ना।

जल प्रबंधन और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना।

FPOs और डिजिटल मंडियों को मजबूत करना।

"किसान की उन्नति ही देश की उन्नति है।"
- सरदार वल्लभभाई पटेल

क्या आप किसी विशेष राज्य में लघु कृषि के मॉडल या नई कृषि तकनीकों के बारे में अधिक जानकारी चाहेंगे? ???




Leave a comment

We are accepting Guest Posting on our website for all categories.


Comments