लालच बुरी बला
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एक समय की बात है एक गांव में किसान रहता था वह बहुत गरीब था एक दिन किस को एक मुर्गा मिला सोन के अडे देता था वह रोज सोने के अंडे बेचता था और बदले में पैसे लेता था अब किसान के साथ बहुत पैसा जमा गया था किसान कुछ ही दिन अमीर हो गया था उनके चर्चे दूर-दूर तक सुने जाती थी एक दिन एक दिन उसे आदमी मन ही मन मैं सच कि यह मुर्गा रोज आना अंडे देत है मतलब की इस मर्गी पेट के अंदर बहुत सारे अड होंगे क्यों ना मुर्गी को मार कर उसके पेट से सारे एअड निकाल दिया जाए और मैं सबसे अमीर बन जाऊंगा
अगले दिन उसे आदमी ने अपनी पत्नी के मिलकर एक दानेदार सोच से मुर्गे को पकड़ लया और उसका पेट चीर दिया मुर्गे को मार डला मुर्गा मार्कर जो पाना था एक दिन में एक अंडा भी खो दिया
सिख = इस कहानी से हम यह सिख मिलते हैं कि किसी भी मनुष्य को जितनाहै इतने में ही संतुष्ट करना चाहिए क्योंकि लालच बुरी बला है
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